जम्मू, 29 अक्तूबर 2025 :
जम्मू और कश्मीर बहुजन समाज पार्टी (BSP) के प्रदेश अध्यक्ष श्री दर्शन राणा ने आज एक तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू विश्वविद्यालय सहित प्रदेश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में संविदा (Contractual) प्राध्यापकों और शिक्षकों के साथ हो रहा अन्याय अब असहनीय हो चुका है।
जहाँ एक ओर भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में गुजरात सरकार को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि संविदा सहायक प्रोफेसरों (Assistant Professors) को न्यूनतम नियमित वेतनमान (Minimum of the Scale) दिया जाए, वहीं जम्मू और कश्मीर में विश्वविद्यालयों के योग्य, पीएचडी और नेट/सेट उत्तीर्ण प्राध्यापकों को आज भी मात्र ₹28,000 से ₹30,000 प्रतिमाह पर काम करने को मजबूर किया जा रहा है — यह न केवल शिक्षक वर्ग का अपमान है, बल्कि संविधान के “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत का खुला उल्लंघन भी है।
श्री दर्शन राणा ने कहा कि जब UGC के 7वें वेतन आयोग के अनुसार सहायक प्रोफेसर के लिए प्रारंभिक वेतनमान ₹57,700 (लेवल-10) निर्धारित है, तो जम्मू विश्वविद्यालय और अन्य सरकारी संस्थान इस न्यायसंगत वेतन को क्यों नहीं लागू कर रहे? यह स्थिति तब और अधिक गंभीर हो जाती है जब इन्हीं संविदा शिक्षकों से विश्वविद्यालय नियमित अध्यापन, परीक्षा-कार्य और शोध-निर्देशन जैसे सभी दायित्वों की अपेक्षा करता है, परंतु उन्हें न तो स्थायित्व दिया जाता है, न वेतन-वृद्धि, और न ही किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा सुविधा।
उन्होंने कहा कि यह दोहरा मापदंड शिक्षण जगत में गहरी निराशा और हताशा फैला रहा है। उच्च शिक्षित युवाओं को ₹28,000 में ठेका पर पढ़ाने के लिए मजबूर करना न केवल उनके श्रम का शोषण है बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सीधा प्रहार है।
बहुजन समाज पार्टी यह मांग करती है कि |
जम्मू विश्वविद्यालय सहित सभी सरकारी एवं अर्ध-सरकारी संस्थानों में संविदा शिक्षकों को UGC के अनुसार न्यूनतम वेतनमान (₹57,700 से ₹70,000 प्रतिमाह) तत्काल दिया जाए।
सभी संविदा शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के तहत नियमित प्राध्यापकों के समकक्ष सम्मान और सुविधाएँ दी जाएँ।
शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करे कि शीतकालीन/ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान वेतन-कटौती बंद की जाए।
संविदा शिक्षकों के स्थायीकरण हेतु एक स्पष्ट नीति और समयबद्ध कार्यक्रम घोषित किया जाए।
श्री राणा ने कहा कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मुद्दे पर शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए, तो BSP पूरे प्रदेश में शिक्षक सम्मान आंदोलन चलाएगी, ताकि शिक्षकों को उनका संवैधानिक और मानवीय अधिकार मिल सके।
उन्होंने कहा “जम्मू और कश्मीर की धरती पर ज्ञान का अपमान अब नहीं सहा जाएगा। जो शिक्षक समाज को रोशनी देते हैं, उन्हें गरीबी और अस्थायित्व के अंधेरे में नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को अब निर्णय लेना होगा — या तो न्याय दो, या जनता की अदालत में जवाब दो।”

