दिनांक: 17 अक्तूबर 2025
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जम्मू-कश्मीर इकाई ने यह घोषणा की है कि वह केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों में भाग नहीं लेगी। यह निर्णय पार्टी द्वारा गहन विचार-विमर्श के बाद लिया गया है और यह मौजूदा चुनावी व्यवस्था में बढ़ते धनबल, बाहुबल और असमान अवसरों के विरोध का प्रतीक है। बसपा नेतृत्व का मानना है कि वर्तमान चुनावी व्यवस्था अब जनकल्याण और नीति आधारित राजनीति के बजाय आर्थिक शक्ति और प्रभावशाली वर्गों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है, जिससे सच्चे समाजसेवी और सिद्धांतवादी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर समाप्त हो गए हैं। ऐसे माहौल में केवल राजनीतिक दृश्यता के लिए चुनाव लड़ना, बहुजन आंदोलन की मूल भावना और संवैधानिक संघर्ष की गरिमा को ठेस पहुँचाता है।
बसपा ने निर्णय लिया है कि चुनावी प्रतिस्पर्धा की बजाय अब वह अपने संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करेगी तथा समाज में जागरूकता फैलाने, शिक्षा, सामाजिक न्याय और आर्थिक समानता पर केंद्रित अभियान चलाएगी। बसपा सुप्रीमो बहन मायावती जी ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि बसपा सत्ता की राजनीति नहीं, बल्कि सिद्धांतों की राजनीति करती है। जब तक देश में निष्पक्ष और समान अवसरों वाली चुनावी व्यवस्था स्थापित नहीं होती, तब तक पार्टी जनता में राजनीतिक जागरूकता और संगठन निर्माण के पथ पर अग्रसर रहेगी।
राज्य अध्यक्ष दर्शन राणा ने कहा कि उपचुनाव न लड़ने का यह निर्णय किसी प्रकार की कमजोरी नहीं, बल्कि वैचारिक दृढ़ता और आत्मसम्मान का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर इकाई अब व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम चलाएगी और युवाओं, विद्यार्थियों तथा श्रमिकों से सीधे संवाद स्थापित करेगी ताकि संविधानिक अधिकारों, सामाजिक समानता और रोजगार के मुद्दों पर जनचेतना को मजबूत किया जा सके।
यह निर्णय बसपा के लिए एक वैचारिक पुनर्गठन और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों की तैयारी का चरण होगा। पार्टी ने पुनः दोहराया है कि वह बहुजन, दलित और वंचित समाज के अधिकारों के लिए संवैधानिक और लोकतांत्रिक मार्ग पर संघर्ष जारी रखेगी। बसपा का लक्ष्य वही रहेगा —
“सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” — अर्थात सभी के कल्याण और सुख के लिए।

